https://www.blogger.com/blog/post/edit/3729731558147000441/2044075230376321986
Thursday, October 12, 2023
Wednesday, June 21, 2023
India valued the most important: Highest Point in my Career in Foreign Service:
While covering the visit of the Indian delegation led by Prime Minister Modi to USA right from Washington, I feel the most proud of having served India as IFS officer. India today has gained the highest place in the family of nations. With Modi leading India 's policies, we are recognised as an apostle of peace throughout the world. India is valued equally important for most of the countries in the world, be it USA, Russia, Ukraine, Australia, Gulf countries or Pacific Islands. Today we are not only leading in the Yoga skills, but also attracting manufacturers of leading companies of the world's most powerful countries.
Monday, March 13, 2023
Karmyog, gyanyog, bhaktiyog k mahatwa
Wednesday, February 15, 2023
Yog ke mahatva
मनुक्खक जीवन मे yog ke उपयोगिताक के ध्यान मे रखैत कहल गेल छलैक कि आलसी क लेल ई कर्मपेरक छैक, डरपोकक लेल साहसवरधेक छैक , निराश क लेल ई आ आशावरधक छैक, मरणासनन क लेल नवजीवन छैक एवं सभ कछेत्र मे सफल जीवन यापन कए लेल मार्गदर्शक छैक।
Sunday, December 15, 2019
Yoga of Selfless Action
Thursday, December 5, 2019
Bhagwad Gita in brief
Tuesday, November 12, 2019
Thursday, November 2, 2017
Monday, September 21, 2015
Sunday, April 5, 2015
Friday, April 3, 2015
Monday, March 16, 2015
Sunday, August 31, 2014
विदेश, विदेश नीति तथा ओकर व्यक्तिगत एवं सामूहिक आवश्यकता
पुरना जमाना में हमरा लोकनि के परिचय अंग्रेज, पश्चिमी एशियन व यूनानी सं भेल जे भारत सS आर्थिक सम्पदा अरजय लेल अयलाह आ युद्ध करैत साम्राज्य स्थापित कैलन्हि। परन्तु अजुका जुग में तS सूचना एवं संचार तकनिकी क आगमन व परिणामस्वरूप सामाजिक मीडिया विस्फोट क संगे दुनिया क सब देश के हरेक बात मनुक्ख क मुट्ठी में सिमटि गेलैक अछि। वसुधैव कुटुम्बकम के अर्थ में हमरा लोकनि ग्लोबली अन्योन्याश्रय भय चुकल छी। आब बाउ बढ़ल कुटमैती क अतिरिक्त जिम्मेदारी तS निमाहबे परत। आ कुटुमैती नीक त लिय ने, " मीन पीन पाठींन पुराना, भरि भरि भार कहारन आना " अरब, ईरान, एमिरात, मध्य एशिया, वेनेज़ुएला व् अफ्रीका स आवश्यक ऊर्जा लिय, अफ्रीका स सोना, ताम्बा, हीरा,मोती व् जवाहरात लीय, अमरीका, जापान, इजराइल, दक्षिण अफ्रीका स अस्त्र शस्त्र लिय। चीन, पाकिस्तान सॅ शांति लिय। दुनिया के अन्य भाग स सेहो किछु नीके भेटत। आ कोन देश एहन छै जतह सॅ आवागमन, व्यापार, संचार, निवेश, विद्या, तकनिकी व विचार विनिमय एवं आपसी सहयोग कैलाक फैदा नहि छैक ? जौं पडोसी सं कुटुमैती में कटुतो अछि तैयो पड़ोसी बदलल त नहि जायत, जेना तेना निमाह परत। आ बौआ विदेश जा क कमाइत छथि त लिय ने पौ बारह।
अगिला ब्लॉग में खरिआरि क विषय के अन्य पहलू पर चर्चा करब। ताबत एहि चर्चा के आगू बढ़ाबक हेतु विश्व मामला क भारतीय परिषद के वेबसाइट ( http://www.icwa.in/ ) देखू।
Tuesday, July 29, 2014
Mamev sharanam. braja
Saturday, July 26, 2014
Dream to internationalise Chakauti
Saturday, May 18, 2013
Viyogi Story
Monday, February 20, 2012
Aum Namah Sheetaleshwaray Namah : ॐ नमः शीतलेश्वराय नमः
ॐ शीतलेश्वराय नमः 
ॐ शाम्बशिवाय नमः
जटाटवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित
गलेऽव-लम्ब्य-लम्बितां-भुजङ
डमड्डमड्डमड्डम-न्निनादव-ड्
चकार-चण्ड्ताण्डवं-तनोतु-नः
जटा-कटा-हसं-भ्रम भ्रमन्नि-लिम्प-निर्झरी-
-विलोलवी-चिवल्लरी-विराजमान
धगद्धगद्धग-ज्ज्वल-ल्ललाट-प
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम .. २..
धरा-धरेन्द्र-नंदिनी विलास-बन्धु-बन्धुर
स्फुर-द्दिगन्त-सन्तति प्रमोद-मान-मानसे .
कृपा-कटाक्ष-धोरणी-निरुद्ध-
क्वचि-द्दिगम्बरे-मनो विनोदमेतु वस्तुनि .. ३..
जटा-भुजङ्ग-पिङ्गल-स्फुरत्फ
कदम्ब-कुङ्कुम-द्रव प्रलिप्त-दिग्व-धूमुखे
मदान्ध-सिन्धुर-स्फुरत्त्व-
मनो विनोदमद्भुतं-बिभर्तु-भूतभर
सहस्र लोचन प्रभृत्य-शेष-लेख-शेखर
प्रसून-धूलि-धोरणी-विधू-सरा
भुजङ्गराज-मालया-निबद्ध-जाट
श्रियै-चिराय-जायतां चकोर-बन्धु-शेखरः ॥ ५..
ललाट-चत्वर-ज्वलद्धनञ्जय-स्
निपीत-पञ्च-सायकं-नमन्नि-लि
सुधा-मयूख-लेखया-विराजमान-श
कराल-भाल-पट्टिका-धगद्धगद्ध
द्धनञ्ज-याहुतीकृत-प्रचण्डपञ्च-सायके
धरा-धरेन्द्र-नन्दिनी-कुचाग
-प्रकल्प-नैकशिल्पिनि-त्रिल
तिर्मम … ७॥
नवीन-मेघ-मण्डली-निरुद्ध-दु
कुहू-निशी-थिनी-तमः प्रबन्ध-बद्ध-कन्धरः
निलिम्प-निर्झरी-धरस्त-नोतु
कला-निधान-बन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥ ८..
प्रफुल्ल-नीलपङ्कज-प्रपञ्च-कालिमप्रभा-
-वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचिप्
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकछिदं तमंतक-च्छिदं भजे .. ९..
अखर्व सर्व-मङ्ग-लाकला-कदंबमञ्जरी
रस-प्रवाह-माधुरी विजृंभणा-मधुव्रतम् .
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्त-कान्ध-कान्तकं तमन्तकान्तकं भजे .. १०..
जयत्व-दभ्र-विभ्र-म-भ्रमद्भ
द्विनिर्गमत्क्रम-स्फुरत्कर
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ
ध्वनि-क्रम-प्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः .. ११..
दृष-द्विचित्र-तल्पयोर्भुजङ
-गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्वि-पक्षपक्षयोः .
तृष्णार-विन्द-चक्षुषोः प्रजा-मही-महेन्द्रयोः
समप्रवृतिकः कदा सदाशिवं भजे .. १२..
कदा निलिम्प-निर्झरीनिकुञ्ज-कोट
विमुक्त-दुर्मतिः सदा शिरःस्थ-मञ्जलिं वहन् .
विमुक्त-लोल-लोचनो ललाम-भाललग्नकः
शिवेति मंत्र-मुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् .. १३..
इदम् हि नित्य-मेव-मुक्तमुत्तमोत्तम
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धि-मेति-संततम् .
हरे गुरौ सुभक्ति-माशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् .. १४..
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः
शंभुपूजनपरं पठति प्रदोषे .
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः .. १५..







